Tuesday, August 18, 2026

चर्चा (समय का सदुपयोग)

चर्चा (समय का सदुपयोग)

1. समय अमूल्य है ।
2. समय की बर्बादी : मोबाइल, आलस आदि
3. समय का सदुपयोग : टु डु लिस्ट, दैनिक दिनचर्या, टाइम मैनेजमेंट, संकल्प आदि
4. जीवन का परावर्तन हो जाना

चर्चा (गुरु पौर्णिमा उत्सव)

गुरु पौर्णिमा उत्सव

1. हमारे गुरु कौन है : घर , समाज , शाखा
2. गुरु हमे क्या देता है और क्यों ?
3. भगवा ध्वज ही गुरु क्यों ?
4. गुरु को अर्पण क्या करे ? शाखा में और बाहर
5. संघ के 6 उत्सव कौन से है ?
6. गुरु पौर्णिमा उत्सव मनाने का कारण क्या है ?
7. शाखा में इस उत्सव में क्या विशेष होता है ?

Tuesday, June 9, 2026

चर्चा (छत्रपति शिवाजी महाराज)


चर्चा (छत्रपति शिवाजी महाराज)


1. जीजामाता, समर्थ गुरु रामदास, दोदोजी कोंडदेव

2. गुरिल्ला युद्ध नीति

3. स्वराज्य की स्थापना

4. छत्रपति के मित्र, सहयोगी (जीवा म्हाला, वीर तानाजी मालुसरे, वीर बाजीप्रभु देशपांडे आदि)

5. स्वदेशी

6. प्रसंग : अफजलखान का वध, राज्याभिषेक आदि

7. नौसेना

8. अन्य

Thursday, May 7, 2026

समय प्रबंधन


समय प्रबंधन

1. समय की बर्बादी
सोशल मीडिया, आलस्य, टालमटोल, टीवी आदि
2. समय की कीमत
सबको 24 घंटे, समय की कमी, समय पैसो से ज्यादा कीमती है ।
3. समय का सदुपयोग
To do list बनाना, लक्ष्य बनाना, टाइम टेबल बनाना, अनुशासन रखना, सुबह जल्दी उठना ।

Wednesday, April 1, 2026

चरित्र निर्माण


चरित्र निर्माण

1. चरित्र क्या है ?
चरित्र आंतरिक और बाहरी व्यवहार दोनों को दर्शाता है।
आंतरिक व्यवहार जैसे नैतिकता, सत्यनिष्ठा, अनुशासन, धैर्य, शौर्य, साहस, त्याग आदि और बाहरी व्यवहार जैसे लोगो से बातचीत, नम्रता आदि

2. चरित्र निर्माण जरूरी क्यों ?
आज के युग में भौतिकवाद, भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता, स्वार्थ की भावना बढ़ रही है।
राष्ट्र की असली शक्ति उनके नागरिकों के चरित्र पर निर्भर करती है ।
बिना चरित्र के शिक्षा, धन या शारीरिक शक्ति व्यर्थ है।

 3. चरित्र निर्माण के आयाम
बाहरी चरित्र : शारीरिक शक्ति, अनुशासन, लोगो से संपर्क करने की योग्यता आदि
आंतरिक चरित्र : एकाग्रता, त्याग, सकारात्मक सोच, सत्य कथन, निरंतर सीखना, सेवा, अहंकार का त्याग आदि





वित्तीय समस्या और समाधान

वित्तीय समस्या और समाधान 

1. वित्तीय समस्या क्या होती है
(आय कम और खर्च ज्यादा, कर्ज का बढ़ना, बचत न होना, आपात स्थिति (बीमारी, नौकरी का जाना, व्यवसाय में नुकसान आदि), गलत निवेश

2. मुख्य कारण
(बिना बजट के खर्च करना, दिखावा करना, उधार लेना आदि)

3. समाधान
(बजट बनाना, आपातकालीन फ़ंड बनाना, बचत की आदत ( पहले बचत फिर खर्चा), सही निवेश (FD, SIP, सोने चाँदी में निवेश , आदि ) आतिरिक्त आय (किसी अन्य कौशल से)

संघ दृश्य (बाहरी लोगो को संघ का दृश्य )


संघ दृश्य (बाहरी लोगो को संघ का दृश्य )

(सूत्र : ध्वज, अनुशासन, चप्पल की कतार, संघ स्थान की साफ़ सफाई, गणवेश, शारीरिक और बौद्धिक कार्यक्रम की नित्यता )

पंच परिवर्तन

 पंच परिवर्तन 

1. पर्यावरण : जल और ऊर्जा बचाना, हरियाली बढ़ाना, सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करना, वाहन का उपयोग कम करना और सार्वजनिक वाहन का उपयोग करना,, इंग्लिश के 3 R का उपयोग करना : Reduce, Reuse, Recycle
2. कुटुंब प्रबोधन : परिवार में सांस्कृतिक, नैतिक और आध्यात्मिक जागरण लाना, परिवार सुखी, मजबूत और संस्कारवान बने, पारिवारिक संवाद बढ़ाना,
3. नागरिक शिष्टाचार : यातायात के नियमो का पालन करना, सार्वजनिक संपत्तियों का संरक्षण, कचरा यहाँ वहाँ न फेकना, देश की विरासत को सहेज कर रखना
4. सामाजिक समरसता : भेद भाव नहीं होना चाहिए। सभी हिन्दू एक है चाहे वो किसी भी पंथ, भाषा या जाति के हो ।
5. स्व का बोध : स्वदेशी, अपना धर्म, अपनी संस्कृति, अपनी पहचान, आत्मनिर्भरता, आत्म अनुशासन, स्वनिर्भरता

Tuesday, March 31, 2026

राष्ट्र का निर्माण — हमारी भूमिका

 

राष्ट्र का निर्माण — हमारी भूमिका


1. राष्ट्र निर्माण केवल सरकार का काम नहीं
, समाज की भी जिम्मेदारी।

2. अच्छे नागरिक बनना: अनुशासन, स्वच्छता, नियमो का पालन, घर और समाज की जवाबदारी आदि ।
3. “मुझे क्या मिलेगा
?” की जगह “मैं क्या दे सकता हूँ?” का दृष्टिकोण।
4. जाति भेद
, भाषा भेद को हटाकर सनातन धर्म को मजबूत करना ।
5. अपने नायकों को याद रखकर उनसे सिखना जैसे छत्रपति शिवाजी महाराज
, श्री गुरु गोबिन्द सिंह, भगत सिंह आदि
6. व्यसनों से दूर रहना जैसे बीड़ी
,सिगरेट, शराब, तंबाकू, आलस, काम को टालना आदि।

 

कुटुंब प्रबोधन (परिवार जागरण)

 


कुटुंब प्रबोधन (परिवार जागरण)

1. परिवार की पारंपरिक भूमिका :
समाज का आधार, संयुक्त परिवार ने समाज को नैतिक और सामाजिक स्थिरता प्रदान की ।

2. आधुनिक चुनौतियां :
एकल परिवार, कामकाजी माता – पिता, डिजिटल मीडिया, पश्चिम प्रभाव, जनरेशन गेप, तलाक दर में वृद्धि आदि

3. राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य :
मजबूत परिवार – मजबूत राष्ट्र, हिन्दुत्व की भावना का बढ़ना आदि

4. समाधान :


संघ के सिद्धान्त , दैनिक शाखा गतिविधियां, सामूहिक चर्चा, संयुक्त भोजन और भजन, स्वदेशी जीवन शैली, उत्सवों का आयोजन आदि

स्व का बोध

 

स्व का बोध

1. स्वदेशी :

क. विदेशी अच्छा और स्वदेशी ठीक ठीक यह मानसिकता बदलनी होगी।
ख. ख़रीदारी में सजगता
ग. तकनीकी में भी स्वदेशी
घ. स्वयं का आदर्श रखना
ग. नए नए प्रयोग करना स्वदेशी बढ़ाने के लिए

2. स्वभाषा : घर में, समाज में , मित्रों के साथ स्वभाषा का उपयोग करना।

3. स्वाधीन : हर बात में पश्चिम का अनुकरण न करना ।

4. स्वभोजन : पिज्जा, बर्गर आदि स्वास्थ्य के लिए उत्तम नहीं है ।

 

संघ के संस्कार और आज की चुनौतियाँ


संघ के संस्कार और आज की चुनौतियाँ

1. विषय प्रवेश : संघ का उद्देश्य केवल शाखा लगाना नहीं है बल्कि जीवन में संस्कारों को उतरना है । आज के समाज के लिए तो वे और भी जरूरी हो गए हैं ।
2. संघ के संस्कार क्या है : अनुशासन, देशप्रेम, परस्पर सहयोग, समाज सेवा, स्वावलंबन आदि
3. आज की चुनौतियाँ क्या है : सोशल मीडिया का प्रभाव, पारिवारिक विघटन, नैतिक मूल्यों की गिरावट आदि
4. इन चुनौतियाँ में संघ क्या कर सकता है : समाज को दिशा देना, सेवा भाव जागृत करना, समरसता बढ़ाना आदि
5. संघ संस्कारों को कैसे अपनाएं : नियमित शाखा, घर परिवार में एकता और प्रेम, समाज में सक्रियता आदि
6. उदाहरण : आपदा काल में, करोना काल में, श्रीराम मंदिर से समाज परिवर्तन, डॉक्टर जी का जीवन आदि


गुरु पौर्णिमा उत्सव

 

गुरु पौर्णिमा उत्सव

(सूत्र :
1. हमारे गुरु कौन है : घर , समाज , शाखा
2. गुरु हमे क्या देता है और क्यों ?
3. भगवा ध्वज ही गुरु क्यों ?
4. गुरु को अर्पण क्या करे ? शाखा में और बाहर
5. संघ के 6 उत्सव कौन से है ?
6. गुरु पौर्णिमा उत्सव मनाने का कारण क्या है ?
7. शाखा में इस उत्सव में क्या विशेष होता है ?

परिवार प्रबोधन – सशक्त समाज

 

         परिवार प्रबोधन – सशक्त समाज


1. संस्कार – परिवार का मूल धर्म : बच्चे घर से ही सीखते हैं, वाणी, आचरण और व्यवहार के माध्यम से संस्कार देना ।
2. संवाद – संबंधों की संजीवनी : संवाद से दूरी यानि मन की दूरी, टीवी/ मोबाइल के कारण संवाद नहीं होता, कम से कम 30 मिनट संवाद होना चाहिए ।
3. परिवार की एकता – समाज की शक्ति : सयुंक्त परिवार यानि सामाजिक सुरक्षा, परिवार का टूटना यानि समाज का टूटना ।
4. धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का पालन : घर में त्योहार, पूजा आदि से बच्चों को संस्कार मिले ।
5. सामाजिक चेतना का केन्द्र : सेवा, सहयोग, स्वदेशी, स्वच्छता, पर्यावरण के संस्कार बनाएँ ।

 

समाज जीवन में स्वयंसेवक का व्यवहार

 


समाज जीवन में स्वयंसेवक का व्यवहार

सूत्र :
 चरित्रशीलता और नि: स्वार्थता :
 पारदर्शी जीवन, बिना दिखावे का कार्य, सत्य, ईमानदारी का पालन,

विनम्रता और सेवाभाव :
अहंकार रहित जीवन, सेवा का भाव, छोटों के प्रति स्नेह और बड़ो के प्रति आदर, समाज की हर कठिनाई का समाधान करना

कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन :
 ज़िम्मेदारी को उत्तम ढंग से पूर्ण करना, समय का पालन करना और दूसरों से भी करवाना

सामाजिक समरसता का पालन :
 जाति, भाषा, प्रांत आदि के भेदभाव को न मानना, हिन्दू सारा एक यह विचार को मानना

नेतृत्व और प्रेरणास्त्रोत बनना : दूसरों के लिए प्रेरणा बनना, समस्याओं का समाधान करना ।

इसके अलावा स्वावलंबन, सकारात्मक दृष्टिकोण आदि भी व्यवहार के अंग हो सकते हैं

सबल समाज



सबल समाज

 सूत्र :
 सबल समाज किसे कहते हैं :
जागरूक समाज, मूल्यों के प्रति आत्मविश्वास, अपनी परंपरा, आदर्शों और संस्कृति पर गर्व, एकता का भाव, एकात्मता का भाव

समाज निर्बल कब बनता है :
स्व की विस्मृति, स्वार्थी और अहंकारी भावना, जाती पंथ का भेदभाव, एकता का अभाव, राष्ट्रभाव न होना

समाज सबल क्यों होना चाहिए :
व्यक्ति की सुरक्षा, समाज का सम्मान, निर्बल समाज यानि शक्तिहीन समाज

समाज को सबल बनाने की प्रक्रिया :
स्व का भाव जागृत करना, एकता का निर्माण करना, आदर्श व्यक्ति का निर्माण, गौरवशाली इतिहास की स्मृति,
नि: स्वार्थ भावना का निर्माण, एकात्मता का भाव

शाखा खेल

 

शाखा खेल

सूत्र : खेल का उद्देश्य क्या है ?
शारीरिक शक्ति, चपलता, दिमाग का संतुलन, सोचने समझने की शक्ति का विकास ,
खेलो के प्रकार कौन से हैं ?
बैठ जाने वाले खेल, द्वि यानि दो तति के खेल, समूह के खेल, युद्ध के खेल आदि और उनके उदाहरण),
खेल के समय क्या क्या ध्यान देना चाहिए ?
अनुशासन, हार - जीत में सम रहना, यह खेल पसंद है , यह खेल पसंद नहीं ये बाते ना हो.
खेलो से हम क्या सीखते हैं ?
अनुशासन, त्याग, नेतृत्व के गुण, चपलता , निर्णय लेने की शक्ति, देश भक्ति आदि

संपर्क और शाखा

संपर्क और शाखा
सूत्र : संपर्क का अर्थ, संपर्क जरूरी क्यों, संपर्क सबके लिए (स्वयंसेवक से लेकर प्रचारक तक ), संपर्क के द्वारा शाखा का विकास आदि

स्वयंसेवक के गुण और व्यवहार



स्वयंसेवक के गुण और व्यवहार
(सूत्र : शाखा में व्यवहार , घर में व्यवहार , समाज में व्यवहार )

चर्चा (समय का सदुपयोग)

चर्चा (समय का सदुपयोग) 1. समय अमूल्य है । 2. समय की बर्बादी : मोबाइल, आलस आदि 3. समय का सदुपयोग : टु डु लिस्ट, दैनिक दिनचर्या, टाइम...