कुटुंब प्रबोधन (परिवार जागरण)
1. परिवार की पारंपरिक भूमिका : समाज का आधार, संयुक्त परिवार ने समाज को नैतिक और सामाजिक स्थिरता प्रदान की ।
2. आधुनिक चुनौतियां :
एकल परिवार, कामकाजी माता – पिता, डिजिटल मीडिया, पश्चिम प्रभाव, जनरेशन गेप, तलाक दर में वृद्धि आदि
3. राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य :
मजबूत परिवार – मजबूत राष्ट्र, हिन्दुत्व की भावना का बढ़ना आदि
4. समाधान :
संघ के सिद्धान्त , दैनिक शाखा गतिविधियां, सामूहिक चर्चा, संयुक्त भोजन और भजन, स्वदेशी जीवन शैली, उत्सवों का आयोजन आदि
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