समाज जीवन में स्वयंसेवक का व्यवहार
सूत्र :
चरित्रशीलता और नि: स्वार्थता :
पारदर्शी जीवन, बिना दिखावे का कार्य, सत्य, ईमानदारी का पालन,
विनम्रता और सेवाभाव :
अहंकार रहित जीवन, सेवा का भाव, छोटों के प्रति स्नेह और बड़ो के प्रति आदर, समाज की हर कठिनाई का समाधान करना
कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन :
ज़िम्मेदारी को उत्तम ढंग से पूर्ण करना, समय का पालन करना और दूसरों से भी करवाना
सामाजिक समरसता का पालन :
जाति, भाषा, प्रांत आदि के भेदभाव को न मानना, हिन्दू सारा एक यह विचार को मानना
ज़िम्मेदारी को उत्तम ढंग से पूर्ण करना, समय का पालन करना और दूसरों से भी करवाना
सामाजिक समरसता का पालन :
जाति, भाषा, प्रांत आदि के भेदभाव को न मानना, हिन्दू सारा एक यह विचार को मानना
नेतृत्व और प्रेरणास्त्रोत बनना : दूसरों के लिए प्रेरणा बनना, समस्याओं का समाधान करना ।
इसके अलावा स्वावलंबन, सकारात्मक दृष्टिकोण आदि भी व्यवहार के अंग हो सकते हैं
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