Wednesday, April 1, 2026

पंच परिवर्तन

 पंच परिवर्तन 

1. पर्यावरण : जल और ऊर्जा बचाना, हरियाली बढ़ाना, सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करना, वाहन का उपयोग कम करना और सार्वजनिक वाहन का उपयोग करना,, इंग्लिश के 3 R का उपयोग करना : Reduce, Reuse, Recycle
2. कुटुंब प्रबोधन : परिवार में सांस्कृतिक, नैतिक और आध्यात्मिक जागरण लाना, परिवार सुखी, मजबूत और संस्कारवान बने, पारिवारिक संवाद बढ़ाना,
3. नागरिक शिष्टाचार : यातायात के नियमो का पालन करना, सार्वजनिक संपत्तियों का संरक्षण, कचरा यहाँ वहाँ न फेकना, देश की विरासत को सहेज कर रखना
4. सामाजिक समरसता : भेद भाव नहीं होना चाहिए। सभी हिन्दू एक है चाहे वो किसी भी पंथ, भाषा या जाति के हो ।
5. स्व का बोध : स्वदेशी, अपना धर्म, अपनी संस्कृति, अपनी पहचान, आत्मनिर्भरता, आत्म अनुशासन, स्वनिर्भरता

Tuesday, March 31, 2026

राष्ट्र का निर्माण — हमारी भूमिका

 

राष्ट्र का निर्माण — हमारी भूमिका


1. राष्ट्र निर्माण केवल सरकार का काम नहीं
, समाज की भी जिम्मेदारी।

2. अच्छे नागरिक बनना: अनुशासन, स्वच्छता, नियमो का पालन, घर और समाज की जवाबदारी आदि ।
3. “मुझे क्या मिलेगा
?” की जगह “मैं क्या दे सकता हूँ?” का दृष्टिकोण।
4. जाति भेद
, भाषा भेद को हटाकर सनातन धर्म को मजबूत करना ।
5. अपने नायकों को याद रखकर उनसे सिखना जैसे छत्रपति शिवाजी महाराज
, श्री गुरु गोबिन्द सिंह, भगत सिंह आदि
6. व्यसनों से दूर रहना जैसे बीड़ी
,सिगरेट, शराब, तंबाकू, आलस, काम को टालना आदि।

 

कुटुंब प्रबोधन (परिवार जागरण)

 


कुटुंब प्रबोधन (परिवार जागरण)

1. परिवार की पारंपरिक भूमिका :
समाज का आधार, संयुक्त परिवार ने समाज को नैतिक और सामाजिक स्थिरता प्रदान की ।

2. आधुनिक चुनौतियां :
एकल परिवार, कामकाजी माता – पिता, डिजिटल मीडिया, पश्चिम प्रभाव, जनरेशन गेप, तलाक दर में वृद्धि आदि

3. राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य :
मजबूत परिवार – मजबूत राष्ट्र, हिन्दुत्व की भावना का बढ़ना आदि

4. समाधान :


संघ के सिद्धान्त , दैनिक शाखा गतिविधियां, सामूहिक चर्चा, संयुक्त भोजन और भजन, स्वदेशी जीवन शैली, उत्सवों का आयोजन आदि

स्व का बोध

 

स्व का बोध

1. स्वदेशी :

क. विदेशी अच्छा और स्वदेशी ठीक ठीक यह मानसिकता बदलनी होगी।
ख. ख़रीदारी में सजगता
ग. तकनीकी में भी स्वदेशी
घ. स्वयं का आदर्श रखना
ग. नए नए प्रयोग करना स्वदेशी बढ़ाने के लिए

2. स्वभाषा : घर में, समाज में , मित्रों के साथ स्वभाषा का उपयोग करना।

3. स्वाधीन : हर बात में पश्चिम का अनुकरण न करना ।

4. स्वभोजन : पिज्जा, बर्गर आदि स्वास्थ्य के लिए उत्तम नहीं है ।

 

संघ के संस्कार और आज की चुनौतियाँ


संघ के संस्कार और आज की चुनौतियाँ

1. विषय प्रवेश : संघ का उद्देश्य केवल शाखा लगाना नहीं है बल्कि जीवन में संस्कारों को उतरना है । आज के समाज के लिए तो वे और भी जरूरी हो गए हैं ।
2. संघ के संस्कार क्या है : अनुशासन, देशप्रेम, परस्पर सहयोग, समाज सेवा, स्वावलंबन आदि
3. आज की चुनौतियाँ क्या है : सोशल मीडिया का प्रभाव, पारिवारिक विघटन, नैतिक मूल्यों की गिरावट आदि
4. इन चुनौतियाँ में संघ क्या कर सकता है : समाज को दिशा देना, सेवा भाव जागृत करना, समरसता बढ़ाना आदि
5. संघ संस्कारों को कैसे अपनाएं : नियमित शाखा, घर परिवार में एकता और प्रेम, समाज में सक्रियता आदि
6. उदाहरण : आपदा काल में, करोना काल में, श्रीराम मंदिर से समाज परिवर्तन, डॉक्टर जी का जीवन आदि


गुरु पौर्णिमा उत्सव

 

गुरु पौर्णिमा उत्सव

(सूत्र :
1. हमारे गुरु कौन है : घर , समाज , शाखा
2. गुरु हमे क्या देता है और क्यों ?
3. भगवा ध्वज ही गुरु क्यों ?
4. गुरु को अर्पण क्या करे ? शाखा में और बाहर
5. संघ के 6 उत्सव कौन से है ?
6. गुरु पौर्णिमा उत्सव मनाने का कारण क्या है ?
7. शाखा में इस उत्सव में क्या विशेष होता है ?

परिवार प्रबोधन – सशक्त समाज

 

         परिवार प्रबोधन – सशक्त समाज


1. संस्कार – परिवार का मूल धर्म : बच्चे घर से ही सीखते हैं, वाणी, आचरण और व्यवहार के माध्यम से संस्कार देना ।
2. संवाद – संबंधों की संजीवनी : संवाद से दूरी यानि मन की दूरी, टीवी/ मोबाइल के कारण संवाद नहीं होता, कम से कम 30 मिनट संवाद होना चाहिए ।
3. परिवार की एकता – समाज की शक्ति : सयुंक्त परिवार यानि सामाजिक सुरक्षा, परिवार का टूटना यानि समाज का टूटना ।
4. धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का पालन : घर में त्योहार, पूजा आदि से बच्चों को संस्कार मिले ।
5. सामाजिक चेतना का केन्द्र : सेवा, सहयोग, स्वदेशी, स्वच्छता, पर्यावरण के संस्कार बनाएँ ।

 

चर्चा (समय का सदुपयोग)

चर्चा (समय का सदुपयोग) 1. समय अमूल्य है । 2. समय की बर्बादी : मोबाइल, आलस आदि 3. समय का सदुपयोग : टु डु लिस्ट, दैनिक दिनचर्या, टाइम...